छतरपुर/पन्ना। केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में छतरपुर और पन्ना की सीमा पर स्थित धौड़न बांध स्थल पर चल रहा प्रदर्शन अब उग्र रूप ले चुका है। विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे ग्रामीणों ने ‘चिता आंदोलन’ शुरू कर दिया है, जहाँ सैकड़ों आदिवासी और ग्रामीण सांकेतिक चिताओं पर लेटकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

आंदोलन की मुख्य बातें

1. सांकेतिक चिताओं पर प्रदर्शनआंदोलन के तीसरे दिन (सोमवार) भावुक कर देने वाले दृश्य सामने आए, जहाँ आदिवासी महिलाएँ अपने मासूम बच्चों के साथ सांकेतिक चिताओं पर लेटी नजर आईं।

2. प्रमुख मांगेंप्रदर्शनकारियों की दो प्रमुख मांगें हैं—उनके नेता अमित भटनागर को तत्काल रिहा किया जाए।विस्थापित होने वाले परिवारों को उचित मुआवजा एवं पुनर्वास के अधिकार प्रदान किए जाएँ।

3. प्रशासनिक बेरुखीआंदोलन का नेतृत्व कर रही दिव्या अहिरवार ने कहा कि प्रशासन की चुप्पी जन-आक्रोश को और अधिक भड़का रही है। हजारों की संख्या में आदिवासी पैदल चलकर धरना स्थल पर पहुँच रहे हैं।

4. नारेबाजीधरना स्थल पर लगातार यह नारे गूँज रहे हैं—“अमित भटनागर को रिहा करो या हमें अग्नि के हवाले करो।

सियासी हलचल:

जीतू पटवारी का दौराइस आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी मंगलवार, 12 मई को आंदोलनकारियों के बीच पहुँचेंगे।दौरे का कार्यक्रम11 मई (रात्रि): खजुराहो आगमन।12 मई (प्रातः): खजुराहो से बमीठा और रनगुवा होते हुए सीधे धौड़न बांध स्थल के लिए प्रस्थान।उद्देश्य: विस्थापित परिवारों से सीधा संवाद करना तथा उनकी मांगों को शासन-प्रशासन के समक्ष मजबूती से उठाना।

पृष्ठभूमि: क्यों हो रहा है विरोध?

केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण दर्जनों गाँवों के आदिवासी परिवार विस्थापित होने वाले हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें उनके ‘जल, जंगल और जमीन’ से बेदखल किया जा रहा है, लेकिन भविष्य की सुरक्षा, पुनर्वास और उचित मुआवजे के संबंध में प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद ग्रामीणों का मौन सत्याग्रह लगातार जारी है।

आंदोलनकारियों का कहना:

“यह केवल जमीन की लड़ाई नहीं, हमारे अस्तित्व की लड़ाई है। जब तक अमित भटनागर रिहा नहीं होते और हमें हमारे अधिकार नहीं मिलते, यह आंदोलन थमेगा नहीं।”— आंदोलनकारी ग्रामीण

By Ankit

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